बाप मरे अंधियारे, बेटा पॉवर हाऊस - बचपन में ये मुहावरा प्रायः सुनने को मिल जाता था परन्तु इसके अर्थ का ज्ञान न होते हुए भी सुनने में बहुत अच्छा लगता था, शायद इसके रोचक शब्दों के कारण। थोड़े बड़े होने पर इसका अर्थ भी समझ में आने लगा। जब कभी कोई बच्चा किसी वस्तु की मांग करता था जो की उस वक्त के हिसाब से थोडी बड़ी होती थी तो ये मुहावरा सुनने को मिल जाता था। वास्तव में इसका अर्थ होता है कि जिस वस्तु की बाप ने कल्पना भी नहीं की आज बच्चा उस वस्तु की मांग कर रहा है।
परन्तु ऐसा तो होता ही है। आज के वैज्ञानिक युग में प्रतिदिन एक से बढ़कर एक चीज़ें आ रही हैं और बच्चा उनको देखकर उसे पाने की अपेक्षा रखता है जिसकी उसके बाप ने कल्पना भी नहीं की थी।
अर्थ कुछ भी हो, आज भी ये मुहावरा सुनने में अच्छा लगता है :)
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Thursday, May 1, 2008
Friday, April 4, 2008
ये देश है वीर जवानों का
आज तक जितनी भी शादियों में मैं गया हूँ लगभग ७५% शादियों में मैंने ये गाना सुना है "ये देश है वीर जवानों का अलबेलों का मस्तानों का"। समझ में नहीं आता था की शादी में इस गाने के क्या औचित्य है। शादी में तो मस्ती वाले गाने होने चाहिए ये गाना क्यों। कई बार तो मैंने अपने दोस्तों से पूछा भी पर कोई सही सा उत्तर नहीं मिला।
जब छोटा था तो सोचता था की ऐसे ही गाते होंगे ये गाना। कोई गाना समझ में नहीं आया तो ये वाला ही गा लिया। पर जब अक्सर ये गाना सुना करता तो मुझे लगा कुछ तो गड़बड़ है।
आज भी मुझे इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिला है परन्तु आस पास के हालत को देख कर लगता है की शादी के बाद आदमी की दुर्गति/दुर्दशा होने वाली होती है इसलिए शादी पर ये गाना गा कर उसे इस बात का एहसास दिलाया जाता है की बेटा तुम देश के वीर जवान हो और तुम किसी भी परिस्थिति से मत घबराना। सारी परेशानियों का डट कर सामना करना।
अगर आपके कुछ अलग विचार हो तो कृपया अपने विचार प्रस्तुत कीजिये :)
जब छोटा था तो सोचता था की ऐसे ही गाते होंगे ये गाना। कोई गाना समझ में नहीं आया तो ये वाला ही गा लिया। पर जब अक्सर ये गाना सुना करता तो मुझे लगा कुछ तो गड़बड़ है।
आज भी मुझे इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिला है परन्तु आस पास के हालत को देख कर लगता है की शादी के बाद आदमी की दुर्गति/दुर्दशा होने वाली होती है इसलिए शादी पर ये गाना गा कर उसे इस बात का एहसास दिलाया जाता है की बेटा तुम देश के वीर जवान हो और तुम किसी भी परिस्थिति से मत घबराना। सारी परेशानियों का डट कर सामना करना।
अगर आपके कुछ अलग विचार हो तो कृपया अपने विचार प्रस्तुत कीजिये :)
Friday, January 25, 2008
दोस्त दोस्त ना रहा
हमसफ़र तुझे समझा, तू रास्ते का पत्थर निकला,
दोस्ती वो क्या निभाएँगे, वो दुश्मन से भी बद्तर निकला।

ज़माने में नहीं होता कोई किसी का,
मिल भी जाए कोई तो उसका क्या भरोसा।
दोस्तों गलत ना समझना, ऐसा कुछ भी मेरे साथ नहीं हुआ है। बस बैठे बैठे उन लोगों का ख्याल आया जिनके साथ ऐसा हुआ है तो उन लोगों की तड़प को महसूस करते हुए ये तस्वीर और चार शब्द लिख दिए।
अगर किसी को अपनी आपबीती का ख्याल आया हो और दुःख पहुँचा हो तो क्षमा चाहता हूँ।
दोस्ती वो क्या निभाएँगे, वो दुश्मन से भी बद्तर निकला।

कड़वी सच्चाई
ज़माने में नहीं होता कोई किसी का,
मिल भी जाए कोई तो उसका क्या भरोसा।
दोस्तों गलत ना समझना, ऐसा कुछ भी मेरे साथ नहीं हुआ है। बस बैठे बैठे उन लोगों का ख्याल आया जिनके साथ ऐसा हुआ है तो उन लोगों की तड़प को महसूस करते हुए ये तस्वीर और चार शब्द लिख दिए।
अगर किसी को अपनी आपबीती का ख्याल आया हो और दुःख पहुँचा हो तो क्षमा चाहता हूँ।
Thursday, October 18, 2007
भैंस हमारी ?? है
मुहावरों की दुनिया में भैंस ने बड़ा नाम कमाया है। कुछ मुहावरे सुनते ही मेरे मन में हमेशा ये ख़याल आता है कि आख़िर उस मुहावरे का मतलब वो ही क्यों है जो कि उसका मतलब है। उस मुहावरे का मतलब कुछ और भी तो हो सकता था या यूं कहें कि उस मुहावरे में उपमा के तौर पे भैंस के स्थान पे किसी और का भी प्रयोग किया जा सकता था। उदाहरणार्थ:
भैंस के आगे बीन बजाना
अब इस मुहावरे में भैंस के आगे ही बीन क्यों बजाते हैं। मुहावरे का मतलब है किसी बेवकूफ को अपनी बात समझाना। भई सबसे बेवकूफ जानवर तो गधे को ही माना गया है। तो ये मुहावरा गधे के आगे बीन बजाना क्यों नहीं है? बेचारी भैंस को जबरदस्ती बेवकूफों कि श्रेणी में डाल दिया गया ही इस मुहावरे के कारण।
अकल बड़ी या भैंस
इस मुहावरे का अर्थ तो मुझे आज तक समझ में नहीं आया। आख़िर इस मुहावरे से क्या निष्कर्ष निकला जाये। अगर भैंस को सबसे बेवकूफ प्राणी समझा जा रह है तो किसी अकलमंद से उसकी तुलना क्यों कि जा रही है और अगर किसी बेवकूफ व्यक्ति कि तुलना कि जा रही है तो वो भैंस से क्यों कि जा रही है गधे से क्यों नहीं कि जा रही है क्योंकि सबसे बेवकूफ प्राणी तो गधा ही है ना।
जिसकी लाठी उसकी भैंस
ये बात हुई ना कुछ। इस मुहावरे को पढ़ के लगता है कि भैंस कि भी कोई औकात है। मतलब जो सबसे ज्यादा पहलवान है वस्तु उसी कि है। इस मुहावरे से भैंस कि गरिमा को चार चाँद लग गए हैं।
गयी भैंसिया पानी में
फिर से भैंस का अपमान। इस मुहावरे में फिर भैंस को केन्द्र बिन्दु क्यों बनाया गया है। अगर किसी का कुछ नुकसान हुआ है तो बेचारी भैंस को क्यों पानी में ढकेल रहे हो भई। ढकेलना ही है तो किसी और को ढकेल दो, जैसे सांड सबसे फालतू जानवर है तो सांड को ढकेल दो पानी में। गया सांड पानी में।
बेचारी भैंस पे इतना जुर्म असह्य है। अगर जल्द ही इन सब मुहावरों में से भैंस को ना निकला गया तो एक दिन आएगा जब सभी भैंसे संगठित होकर मोर्चा निकल देंगी और सभी बच्चों को भूखा रहना पड़ेगा (अब जब भैंस दूध नहीं देगी तो बच्चे तो भूखे ही रहेंगे ना)। अब भी वक़्त है चेत जाओ अन्यथा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो।
भैंस के आगे बीन बजाना
अब इस मुहावरे में भैंस के आगे ही बीन क्यों बजाते हैं। मुहावरे का मतलब है किसी बेवकूफ को अपनी बात समझाना। भई सबसे बेवकूफ जानवर तो गधे को ही माना गया है। तो ये मुहावरा गधे के आगे बीन बजाना क्यों नहीं है? बेचारी भैंस को जबरदस्ती बेवकूफों कि श्रेणी में डाल दिया गया ही इस मुहावरे के कारण।
अकल बड़ी या भैंस
इस मुहावरे का अर्थ तो मुझे आज तक समझ में नहीं आया। आख़िर इस मुहावरे से क्या निष्कर्ष निकला जाये। अगर भैंस को सबसे बेवकूफ प्राणी समझा जा रह है तो किसी अकलमंद से उसकी तुलना क्यों कि जा रही है और अगर किसी बेवकूफ व्यक्ति कि तुलना कि जा रही है तो वो भैंस से क्यों कि जा रही है गधे से क्यों नहीं कि जा रही है क्योंकि सबसे बेवकूफ प्राणी तो गधा ही है ना।
जिसकी लाठी उसकी भैंस
ये बात हुई ना कुछ। इस मुहावरे को पढ़ के लगता है कि भैंस कि भी कोई औकात है। मतलब जो सबसे ज्यादा पहलवान है वस्तु उसी कि है। इस मुहावरे से भैंस कि गरिमा को चार चाँद लग गए हैं।
गयी भैंसिया पानी में
फिर से भैंस का अपमान। इस मुहावरे में फिर भैंस को केन्द्र बिन्दु क्यों बनाया गया है। अगर किसी का कुछ नुकसान हुआ है तो बेचारी भैंस को क्यों पानी में ढकेल रहे हो भई। ढकेलना ही है तो किसी और को ढकेल दो, जैसे सांड सबसे फालतू जानवर है तो सांड को ढकेल दो पानी में। गया सांड पानी में।
बेचारी भैंस पे इतना जुर्म असह्य है। अगर जल्द ही इन सब मुहावरों में से भैंस को ना निकला गया तो एक दिन आएगा जब सभी भैंसे संगठित होकर मोर्चा निकल देंगी और सभी बच्चों को भूखा रहना पड़ेगा (अब जब भैंस दूध नहीं देगी तो बच्चे तो भूखे ही रहेंगे ना)। अब भी वक़्त है चेत जाओ अन्यथा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो।
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